श्रीकृष्ण के उतरते ही क्यों राख बन गया अर्जुन का रथ? जानिए महाभारत का सबसे हैरान कर देने वाला रहस्य

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PC: IN KHABAR

महाभारत के युद्ध और उसके परिणाम के बारे में हम सभी जानते हैं। इस 18 दिनों तक चले महायुद्ध में पांडवों की विजय के बाद एक बेहद हैरान कर देने वाली घटना घटी। जिस रथ पर सवार होकर अर्जुन ने भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण जैसे महान योद्धाओं को परास्त किया था, वह युद्ध समाप्त होते ही श्रीकृष्ण के उतरते ही धू-धू कर जल उठा और राख बन गया।

श्रीकृष्ण की आज्ञा और हनुमान जी का अंतर्धान होना
महाभारत के शल्य पर्व में वर्णित कथा के अनुसार, पांडवों की जीत के बाद श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा कि वे गांडीव और तरकश लेकर पहले रथ से नीचे उतरें। परंपरा से हटकर जब अर्जुन नीचे उतर गए, तब श्रीकृष्ण ने रथ की बागडोर छोड़ी और स्वयं नीचे उतरे। जैसे ही श्रीकृष्ण रथ से उतरे, अर्जुन की ध्वजा पर विराजमान भगवान हनुमान जी अंतर्धान हो गए और देखते ही देखते पूरा रथ अग्नि की लपटों से घिरकर राख हो गया।

क्यों जला अर्जुन का रथ?

यह देखकर चकित अर्जुन ने जब श्रीकृष्ण से इसका रहस्य पूछा, तब भगवान ने बताया:

दिव्यास्त्रों का असर: युद्ध के दौरान भीष्म, द्रोण और कर्ण जैसे महारथियों के भयंकर दिव्यास्त्रों के प्रहार से यह रथ बहुत पहले ही जलकर नष्ट हो चुका था।

श्रीकृष्ण का संरक्षण: स्वयं जगन्नाथ श्रीकृष्ण के रथ पर विराजमान रहने और हनुमान जी के ध्वजा पर होने के कारण वह रथ युद्ध के अंत तक सुरक्षित खड़ा रहा।

उद्देश्य की पूर्ति: जैसे ही पांडवों का विजय-लक्ष्य पूरा हुआ और श्रीकृष्ण रथ से नीचे उतरे, उन दिव्यास्त्रों का प्रभाव सामने आ गया और रथ भस्म हो गया।

अहंकार का अंत और बड़ा संदेश
रथ का जलना अर्जुन के लिए एक बड़ा संदेश था कि महाभारत में उनकी युद्ध-कुशलता के साथ-साथ भगवान श्रीकृष्ण का निरंतर संरक्षण ही उनकी विजय की वास्तविक शक्ति थी।

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