जब कुंती ने खोला था कर्ण का ऐसा राज, जानकर युधिष्ठिर हो गए थे आहत! फिर गुस्से में स्त्रियों को दे दिया था ये बड़ा श्राप

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कुरुक्षेत्र के युद्ध के समाप्त होने के बाद पांडव विजयी हुए थे लेकिन इस जीत की कीमत इतनी बड़ी थी कि हस्तिनापुर में चारों ओर मातम पसरा था। अपनों को खोने के दर्द से हर कोई दुखी और परेशान था। इसी बीच जब पांडव अपने मृत परिजनों के लिए गंगातट पर जल अर्पित कर रहे थे, तब कुंती ने एक ऐसे राज का खुलासा किया जिसने युधिष्ठिर समेत पांचों पांडवों की पूरी दुनिया हिला दी। कुंती ने कहा कि जिसे जीवनभर अपना सबसे बड़ा शत्रु समझते रहे, वह कोई और नहीं बल्कि उनका ज्येष्ठ भाई कर्ण था।
जब कुंती ने खोला राज
महाभारत के स्त्री पर्व के अनुसार मृत योद्धाओं को जल अर्पित करते समय कुंती ने पांडवों को बताया कि कर्ण वास्तव में उनका ही पुत्र था, जिसे उन्होंने विवाह से पहले सूर्यदेव के वरदान से प्राप्त किया था। उनके पास बचपन से दिव्य कवच और कुंडल थे। लेकिन, अविवाहित होने के कारण लोकलाज और परिस्थितियों के डर से उन्होंने नवजात कर्ण को एक पेटी में रखकर नदी में बहा दिया था। बाद में अधिरथ और राधा ने उसका पालन-पोषण किया।
जिस कर्ण से लड़े, वही था उनका भाई
कुंती की बातें सुनकर पांडवों के होश उड़ गए। युधिष्ठिर के लिए ये सदमा सबसे बड़ा था। युद्धभूमि में अर्जुन के हाथों कर्ण की मृत्यु हो चुकी थी, उन्हें इस बात से दुःख था किवह उनका अपना ही भाई था। युधिष्ठिर ने दुखी मन से कहा था कि कर्ण की मृत्यु का दुख उन्हें अभिमन्यु और द्रौपदी के पुत्रों की मृत्यु से भी अधिक पीड़ादायक लग रही है। युधिष्ठिर ने उन्हें अपना भाई मानकर जलांजलि भी दी।
कुंती ने कर्ण को भी समझाने की कोशिश की थी
कुंती ने युद्ध से पहले कर्ण को भी समझाने की कोशिश की थी वह उसके अपने भाई है और उन्हें पांडवों की तरफ से लड़ने का प्रस्ताव दिया था। सूर्यदेव ने भी कर्ण को समझाया था। लेकिन कर्ण ने दुर्योधन के प्रति अपनी मित्रता और निष्ठा नहीं छोड़ी।
गुस्से में युधिष्ठिर ने स्त्रियों को दे दिया श्राप
मां की बात सुनकर युधिष्ठिर इतना दुखी हुए कि बाद में उनका दुःख क्रोध में बदल गया। इसी पीड़ा और क्रोध में उन्होंने स्त्री जाति को श्राप दिया कि, आगे से कोई स्त्री किसी बात को गुप्त नहीं रख सकेगी।
कर्ण का राज बना पांडवों के लिए जिंदगीभर का दर्द
कर्ण की सच्चाई सामने आने के बाद पांडवों के मन में उसके लिए भाई का भाव जागा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. युद्ध समाप्त हो चुका था और उनका ज्येष्ठ भाई उनके हाथों मारा जा चुका था.
