जब गांधारी ने उतारी अपनी आंखों की पट्टी! जानिए दुर्योधन का पूरा शरीर वज्र का होकर भी भीम ने कैसे किया उसका वध

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महाभारत युद्ध के अंतिम चरण में जब कौरवों की सेना पूरी तरह हार चुकी थी और दुर्योधन अकेला पड़ गया था, तब उसे अपनी माता गांधारी के तपोबल की याद आई। वर्षों तक आंखों पर पट्टी बांधकर तपस्या करने वाली गांधारी की दृष्टि में अलौकिक शक्ति आ चुकी थी।
गांधारी का आदेश और श्रीकृष्ण की लीला
कथा के अनुसार, गांधारी ने दुर्योधन से कहा कि वह गंगा में स्नान करके बिना वस्त्र उनके सामने आए, ताकि उनकी दृष्टि उसके पूरे शरीर पर पड़ सके और उसका शरीर वज्र के समान मजबूत हो जाए। जब दुर्योधन अपनी माँ के पास जा रहा था तभी रास्ते में श्रीकृष्ण से उसकी भेंट हुई. यहीं से इस कथा में आता है सबसे बड़ा मोड़.
श्रीकृष्ण ने दुर्योधन से कहा कि एक व्यस्क पुत्र का अपनी माता के समक्ष इस तरह जाना सामाजिक और नैतिक रूप से उचित नहीं है। श्रीकृष्ण की बात मानकर दुर्योधन ने अपनी कमर और जांघों के हिस्से को केले के पत्तों से ढक लिया।
गांधारी की दृष्टि
जब गांधारी ने आंखों से पट्टी हटाई, तो उनकी दृष्टि पड़ते ही दुर्योधन का शरीर वज्र के समान मजबूत हो गया। हालांकि, जो हिस्सा (कमर और जांघ) ढका हुआ था, वह सामान्य ही रह गया। यही कमजोरी बाद में दुर्योधन के विनाश का कारण बनी।
भीम-दुर्योधन गदा युद्ध और प्रतिज्ञा की पूर्ति
युद्ध के अंतिम चरण में दुर्योधन का सामना भीम से हुआ। दोनों के बीच गदा युद्ध शुरू हुआ। दुर्योधन गदा चलाने में बेहद कुशल था और दोनों योद्धाओं के बीच लंबे समय तक मुकाबला चलता रहा। भीम के मन में द्रौपदी के अपमान का बदलना लेना था। सभा में दुर्योधन ने द्रौपदी को अपनी जांघ पर बैठने का संकेत किया था। उस समय भीम ने प्रतिज्ञा की थी कि वह दुर्योधन की जांघ तोड़ेगा।
श्रीकृष्ण के इशारे पर भीम ने गदा युद्ध के सामान्य नियमों के विपरीत दुर्योधन की जांघ पर जोर का प्रहार किया, जिससे दुर्योधन धराशायी हो गया और अंततः उसकी मृत्यु हुई।
