Viral: 'डिलीवरी के बाद 40 दिन तक मर्द कैसे करें सब्र?' - पाकिस्तानी मौलाना के इस बयान पर भड़कीं एक्ट्रेस, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

सोशल मीडिया पर अक्सर अजीबोगरीब और विवादित बयान चर्चा का विषय बन जाते हैं। हाल ही में पाकिस्तान के जाने-माने इस्लामिक स्कॉलर और मुफ्ती तारिक मसूद (Mufti Tariq Masood) का एक ऐसा ही बयान तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने इंटरनेट पर एक नई बहस छेड़ दी है। महिलाओं के स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन को लेकर दिए गए उनके बयान के बाद सोशल मीडिया यूजर्स और जानी-मानी हस्तियों में भारी गुस्सा देखने को मिल रहा है।
आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला और क्यों भड़की हैं पाकिस्तानी एक्ट्रेस:
क्या है मुफ्ती तारिक मसूद का विवादित बयान?
वायरल वीडियो के मुताबिक, मुफ्ती तारिक मसूद महिलाओं की प्रसवोत्तर अवधि (Postpartum Period) पर बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बच्चे के जन्म के बाद महिलाओं को लगभग 40 दिनों तक ब्लीडिंग और शारीरिक कमजोरी का सामना करना पड़ता है, जिसके चलते वे इस दौरान वैवाहिक संबंधों से दूर रहती हैं।
लेकिन इसके आगे मुफ्ती साहब ने पुरुषों का पक्ष लेते हुए अजीब तर्क दिया कि, "अगर डिलीवरी के बाद औरतों को 40 दिन तक परहेज़ करना पड़ता है, तो इसमें मर्द की क्या गलती है? वह इतने लंबे समय तक कैसे सब्र कर सकता है?" उनके इस बयान को सोशल मीडिया पर महिलाओं के अधिकारों और गरिमा के खिलाफ माना जा रहा है।
"...Allah created women to satisfy the lust of men..." - Pak Molvi Tariq Masood https://t.co/P3kmDkHa3d
— Pakistan Untold (@pakistan_untold) October 16, 2026
पाकिस्तानी एक्ट्रेस नादिया हुसैन ने लगाई क्लास
मुफ्ती तारिक मसूद का यह क्लिप सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। इस बयान की तीखी आलोचना करते हुए पाकिस्तान की मशहूर एक्ट्रेस और मॉडल नादिया हुसैन (Nadia Hussain) ने मौलाना को आड़े हाथों लिया।
नादिया हुसैन ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि, "एक मर्द भले ही 40 दिन तक शारीरिक संबंध न बनाए, लेकिन कोई यह नहीं सोचता कि एक औरत बच्चे को अपने गर्भ में पालते हुए नौ महीने तक कितनी मानसिक और शारीरिक तकलीफों से गुजरती है।" उन्होंने इस तरह की बयानबाजी को महिलाओं के प्रति असंवेदनशील और अपमानजनक करार दिया।
सोशल मीडिया पर यूजर्स की प्रतिक्रियाएं
यह वीडियो सामने आने के बाद एक्स (X) और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर लोग लगातार अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। जहां कुछ लोग मुफ्ती के इस बयान को रूढ़िवादी और पितृसत्तात्मक सोच का उदाहरण बता रहे हैं, वहीं कई यूजर्स का कहना है कि मातृत्व और महिलाओं के स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील मुद्दों पर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल बेहद शर्मनाक है।
