भीष्म के वे 5 स्वर्ण बाण… जिनसे पांडवों की मृत्यु थी तय! फिर कृष्ण ने योजना बना कर ऐसे दुर्योधन से छीन लिए बाण

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PC: IN KHABAR


महाभारत का युद्ध सिर्फ कौरवों-पांडवों के बीच हुई धर्म और अधर्म की लड़ाई नहीं बल्कि भगवान कृष्ण की अद्भुत रणनीति और समझदारी का भी प्रमाण है।  कुरुक्षेत्र में जब भाई-भाई आमने-सामने थे, तब कई ऐसे निर्णायक मोड़ आए, जहां कृष्ण ने अपनी बुद्धि से ऐसा कर दिखाया जो बड़े बड़े अस्त्र शस्त्र भी नहीं कर पाते। आज हम आपको एक ऐसी ही कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं जो भीष्म के 5 स्वर्ण बाण से जुड़ी है। दरअसल, कुरुक्षेत्र में पांडवों के सामने सबसे बड़ी चुनौती थे पितामह भीष्म, जिनके सामने बड़े-बड़े योद्धा भी टिक नहीं पा रहे थे। 

 एक रात दुर्योधन ने भीष्म से कहा कि वह पांडवों पर नरमी बरत रहे हैं जिस से वे क्रोधित हो गए और ऐसा वचन दे दिया, जिसने अगले दिन की लड़ाई का परिणाम ही बदल सकता था।  उन्होंने पांच ऐसे बाण तैयार किए, जिस से पांडवों की मृत्यु लगभग तय थी।  लेकिन भगवान कृष्ण ने बड़ी सूझबूझ के साथ दुर्योधन से वो आखिरी हथियार छीन लिया। 

 दुर्योधन को भीष्म पर शक क्यों था?
जानकारी के लिए आपको बता दें कि महाभारत के युद्ध में भीष्म कौरव सेना के सेनापति थे। पांडव उन्हें प्रिय थे लेकिन हस्तिनापुर के सिंहासन के प्रति अपनी प्रतिज्ञा के कारण वे कौरवों की ओर से युद्ध कर रहे थे। इसी कारण दुर्योधन को लगता था कि भीष्म पांडवों को लेकर नरमी बरत रहे हैं। 

उन पर आरोप लगने पर वे आहत होने के साथ क्रोधित भी हुए और कहा कि वह अगले दिन पांडवों का वध करने के लिए पांच बाणों का इस्तेमाल करेंगे। 

दुर्योधन ने मांग लिए पांचों बाण
भीष्म के ये कहने पर भी दुर्योधन को विश्वास नहीं हुआ कि इन बाणों से पांडवों की मृत्यु हो जाएगी। उसे डर था कि कहीं सुबह तक ये बाण किसी तरह नष्ट न हो जाएं। इसी उसने भीष्म से बाण मांग कर अपने पास रख लिए। 

श्रीकृष्ण को हुई जानकारी 

महाभारत कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने योजना बनाई।  कथा के अनुसार, अर्जुन ने किसी समय दुर्योधन को संकट से बचाया था और बदले में दुर्योधन ने उसे पांच मनचाही वस्तुएं देने का वचन दिया था। इसलिए उन्होंने अर्जुन को इस बारे में याद दिलाया। 
 
जब अर्जुन पहुंचे अपने वचन का याद दिलाने 
कथा के अनुसार, कृष्ण के कहने के बाद अर्जुन दुर्योधन के पास पहुंचे और पांच चीजें यानी पांच बाण मांग लिए। हालाकिं दुर्योधन उसे वह नहीं देना चाहता था लेकिन अपने वचन के आगे  वह मजबूर था। उसे बाण देने पड़े। 

भीष्म समझ गए कृष्ण की लीला
जब भीष्म को इस घटना का पता चला तो वे समझ गए कि इसके पीछे श्रीकृष्ण की रणनीति थी. वह जानते थे कि, कृष्ण केवल अर्जुन के सारथी नहीं हैं, बल्कि युद्ध की दिशा को समझने वाले अद्भुत रणनीतिकार भी हैं. भीष्म ने कृष्ण की बुद्धिमत्ता को स्वीकार किया और समझ लिया कि पांडवों की रक्षा स्वयं श्रीकृष्ण कर रहे हैं.

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