पांडवों ने एक रात में बनाया था यह झुका हुआ शिव मंदिर! 1200 साल पुराना है कपिलेश्वर महादेव का मंदिर, जानें इसकी रोचक कथा

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उत्तराखंड के देवभूमि में कई ऐसे रहस्यमयी और प्राचीन मंदिर मौजूद हैं, जिनकी बनावट और इतिहास हर किसी को हैरान कर देता है। अल्मोड़ा के पास स्थित कपिलेश्वर महादेव मंदिर भी एक ऐसा ही अनोखा धाम है, जो सदियों से एक तरफ झुका हुआ होने के बावजूद मजबूती से खड़ा है। करीब 1200 से 1300 साल पुराना यह शिव मंदिर अपनी अनूठी वास्तुकला और लोककथाओं के लिए जाना जाता है।
कहाँ स्थित है कपिलेश्वर महादेव मंदिर?
उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले से लगभग 12 किलोमीटर दूर सिमल्टी गांव के समीप कपिलेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। शकुनी और फड़का नदियों के शांत संगम के पास बसा यह मंदिर प्राकृतिक सुंदरता से घिरा हुआ है।
ऐतिहासिक दृष्टि से इस मंदिर के निर्माण को कत्यूरी राजवंश के काल (8वीं से 9वीं शताब्दी) का माना जाता है।
आखिर क्यों एक तरफ झुका है यह शिव मंदिर?
कपिलेश्वर महादेव मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण इसका एक ओर झुका हुआ ढांचा है। सैकड़ों सालों के प्राकृतिक बदलावों और भूकंपीय हलचलों के बाद भी यह मंदिर बिना गिरे जस का तस खड़ा है।
वैज्ञानिक / भूवैज्ञानिक दृष्टिकोण: विशेषज्ञों के अनुसार, जमीन की बनावट या नींव के नीचे की मिट्टी के खिसकने से इसका झुकाव हुआ हो सकता है।
स्थानीय लोककथा: क्षेत्र की लोकमान्यताओं के अनुसार, इस झुकाव का संबंध दो नागों के बीच हुए पौराणिक संघर्ष से जोड़ा जाता है।
पांडवों और महर्षि कपिल से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं
पांडवों द्वारा एक ही रात में निर्माण: जनश्रुतियों के अनुसार, पांडवों ने अपने अज्ञातवास या वनवास के दौरान एक ही रात में इस मंदिर का निर्माण किया था।
महर्षि कपिल की तपस्या: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सांख्य दर्शन के प्रणेता महर्षि कपिल ने इस पवित्र स्थान पर कठोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए थे। इसी कारण इस धाम का नाम 'कपिलेश्वर' पड़ा।
श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र
मंदिर के गर्भगृह में स्थापित दिव्य शिवलिंग की पूजा-अर्चना के लिए वर्ष भर श्रद्धालु पहुँचते हैं। विशेषकर सावन के महीने, कजरी तीज और महाशिवरात्रि के अवसरों पर यहाँ भव्य मेले और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है।
