Mahabharata: शक्तिशाली योद्धा बर्बरीक, जो सिर्फ 3 बाणों से खत्म कर सकते थे पूरा युद्ध! आज पूजे जाते हैं खाटूश्याम के रूप में

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कुरुक्षेत्र की भूमि पर लड़ा गया महाभारत का युद्ध इतिहास का सबसे भीषण संग्राम था, जिसमें एक से बढ़कर एक पराक्रमी योद्धाओं ने भाग लिया। लेकिन इस महासंग्राम में एक ऐसा योद्धा भी था, जो बिना किसी बड़ी सेना के अकेले ही पूरे महाभारत युद्ध को केवल एक ही पल में समाप्त करने की क्षमता रखता था। उस योद्धा का नाम था बर्बरीक (जिन्हें आज खाटूश्याम जी के नाम से भी पूजा जाता है)।
3 बाणों का अद्भुत रहस्य
बर्बरीक ने देवी कामाख्या की कठोर तपस्या करके तीन अमोघ दिव्य बाण प्राप्त किए थे। इसी कारण उन्हें 'तीन बाणधारी' भी कहा जाता है। इन बाणों की शक्ति इस प्रकार थी:
पहला बाण: उन सभी शत्रुओं और निशानों को चिह्नित (Mark) कर देता था जिन्हें नष्ट करना होता था।
दूसरा बाण: उन सभी लोगों को चिह्नित करता था जिन्हें बचाना और सुरक्षित रखना होता था।
तीसरा बाण: चिह्नित किए गए सभी शत्रुओं का एक साथ वध करके वापस बर्बरीक के तुणीर (तर्कश) में लौट आता था।
"हारे का सहारा" बनने का वचन
जब बर्बरीक महाभारत युद्ध में भाग लेने के लिए अपनी माता से आज्ञा मांगने गए, तो उनकी माता ने उनसे एक वचन लिया— "युद्ध में जो पक्ष हार रहा होगा, तुम उसी का सहारा बनोगे और उसकी तरफ से लड़ोगे।" बर्बरीक ने अपनी माता को यह वचन दे दिया और कुरुक्षेत्र की ओर चल पड़े।
भगवान श्रीकृष्ण की लीला और शीश का दान
भगवान श्रीकृष्ण जानते थे कि युद्ध के दौरान कौरवों की हार निश्चित थी। ऐसे में वचन के अनुसार बर्बरीक हारते हुए कौरवों का साथ देते। लेकिन जैसे ही बर्बरीक कौरवों की तरफ से लड़ते, पांडवों की हार होने लगती और फिर बर्बरीक पांडवों की तरफ आ जाते। इस तरह अंत में दोनों पक्षों का पूरी तरह सर्वनाश हो जाता और कोई भी जीवित नहीं बचता।
धर्म की रक्षा और सृष्टि को विनाश से बचाने के लिए श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण का वेष धारण कर बर्बरीक से दान में उनका शीश (सिर) मांग लिया। महादानी बर्बरीक ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपना शीश काटकर श्रीकृष्ण को दान कर दिया।
अमर गाथा और खाटूश्याम रूप
बर्बरीक की इस भक्ति और महान त्याग से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलयुग में वे उनके अपने नाम 'श्याम' से पूजे जाएंगे। श्रीकृष्ण ने उनके कटे हुए शीश को कुरुक्षेत्र के पास एक पहाड़ी पर स्थापित कर दिया, जहां से बर्बरीक ने पूरा महाभारत युद्ध देखा।
आज वही महाबली बर्बरीक राजस्थान के सीकर जिले में 'श्री खाटूश्याम जी' के रूप में पूरे विश्व में पूजे जाते हैं और लाखों भक्त उन्हें "हारे का सहारा" मानकर उनका दर्शन करने आते हैं।
