Mahabharata: द्रौपदी का चीरहरण और महाभारत से जुड़े 4 ऐसे रहस्य, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं

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PC: Amar ujala

महाभारत केवल कौरवों और पांडवों के बीच युद्ध की गाथा नहीं है, बल्कि यह धर्म, नीति, कर्म और जीवन के सबसे गहरे रहस्यों का भंडार है। इस महाकाव्य से जुड़े कई ऐसे प्रसंग और तथ्य हैं जो आज भी लोगों को हैरान कर देते हैं। आइए जानते हैं महाभारत से जुड़े कुछ ऐसे ही रोचक और अनसुने रहस्यों के बारे में:

1. द्रोपदी का चीरहरण और भगवान कृष्ण का कर्ज
कौरवों की सभा में जब दुशासन ने द्रौपदी का चीरहरण करने का कुप्रयास किया, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उनकी लाज बचाई थी।

कथा का रहस्य: पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान कृष्ण की उंगली गन्ने काटते समय कट गई थी और उससे खून बहने लगा था। यह देखकर द्रौपदी ने तुरंत अपनी साड़ी का एक कोना फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया था। चीरहरण के समय भगवान कृष्ण ने उसी एक धागे के उपकार को चुकाते हुए उनकी लाज की रक्षा अनंत गुना बढ़ाकर की थी।

2. अभिमन्यु की मृत्यु का चक्रव्यूह और पिछला जन्म
महाभारत युद्ध के दौरान 16वें दिन अभिमन्यु की हत्या कौरवों द्वारा मिलकर चक्रव्यूह के नियमों को तोड़कर की गई थी।

रहस्य: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अभिमन्यु दरअसल चंद्रमा के पुत्र 'वरचा' थे। चंद्रमा ने अपने पुत्र को केवल 16 वर्षों के लिए ही पृथ्वी पर भेजने की सहमति दी थी, यही कारण था कि अभिमन्यु युवावस्था में ही वीरगति को प्राप्त हो गए।

3. युद्ध के बाद जीवित बचे कुल कितने योद्धा?
18 दिनों तक चले इस विनाशकारी महायुद्ध में करोड़ों सैनिकों और योद्धाओं ने अपनी जान गंवाई थी।

रहस्य: युद्ध समाप्त होने के बाद कौरव पक्ष से केवल 3 योद्धा जीवित बचे थे—कृपाचार्य, कृतवर्मा और अश्वत्थामा। वहीं पांडव पक्ष की ओर से भगवान श्रीकृष्ण, पांचों पांडव और सात्यकी सहित कुल 10-12 लोग ही जीवित बचे थे।

4. क्या सच में युधिष्ठिर का रथ जमीन से ऊपर चलता था?
कहा जाता है कि धर्मराज युधिष्ठिर हमेशा सत्य बोलते थे, जिसके प्रभाव से उनका रथ जमीन से कुछ इंच ऊपर हवा में चलता था। लेकिन महाभारत युद्ध के दौरान जब उन्होंने द्रोणाचार्य के वध के लिए अश्वत्थामा (हाथी) की मौत का आधा-सत्य बोला, तो उनका रथ जमीन पर आ गया था।

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