Mahabharata: क्या आप जानते हैं युद्ध समाप्त होने के बाद जीवित बचे थे ये 8 महारथी? जानें डिटेल्स

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धर्म और अधर्म के बीच कुरुक्षेत्र की भूमि पर लड़ा गया महाभारत का युद्ध भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा अध्याय है। गीता का ज्ञान देने वाले इस युद्ध में ऐसा भारी रक्तपात हुआ कि पूरा कुरुक्षेत्र लाशों से पट गया था। अठारहवें दिन युद्ध की समाप्ति के बाद जब कौरव पक्ष का पूरी तरह विनाश हो गया और पांडव विजयी हुए, तब दोनों पक्षों की विशाल सेनाओं में से गिने-चुने लोग ही जीवित बच पाए थे। आइए जानते हैं उस भीषण नरसंहार के बाद भी कौन से 8 महारथी सुरक्षित रहे थे:

पांडव पक्ष के 5 जीवित महारथी:

युधिष्ठिर: पांडवों के सबसे बड़े भाई और धर्मराज, जो युद्ध के बाद हस्तिनापुर के सम्राट बने।

भीम: अपनी गदा और अपार शक्ति के लिए प्रसिद्ध दूसरे पांडव भाई।

अर्जुन: भगवान कृष्ण के सखा और महाभारत के मुख्य योद्धा, जिन्होंने युद्ध में गांडीव उठाया था।

नकुल और सहदेव: पांडवों के सबसे छोटे दोनों भाई, जो युद्ध कौशल में निपुण थे।

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कौरव पक्ष और अन्य से जीवित बचे 3 महारथी:

अश्वत्थामा: द्रोणाचार्य के पुत्र, जो कौरवों की ओर से लड़े थे। हालांकि युद्ध के अंत में उन्होंने पांडव शिविर में सोते हुए उप-पांडवों का वध कर दिया था, जिसके बाद उन्हें भगवान शिव द्वारा चिरकाल तक पृथ्वी पर भटकने का श्राप मिला।

कृपाचार्य: कौरवों और पांडवों के कुल गुरु कृपाचार्य भी इस महायुद्ध में जीवित बच गए थे। बाद में वे परीक्षित के गुरु और सप्तर्षियों में गिने गए।

कृतवर्मा: यादव सेना के प्रमुख और कौरवों के सहयोगी कृतवर्मा भी युद्ध के बाद सुरक्षित बच गए थे (हालांकि बाद में यदुवंशियों के आपसी संहार में उनकी भी मृत्यु हो गई थी)।

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इस महायुद्ध का संदेश
महाभारत का यह युद्ध केवल राज्यों की प्राप्ति का संघर्ष नहीं था, बल्कि यह अहंकार, अधर्म और कर्म के सिद्धांतों का एक बड़ा आईना था। युद्ध के अंत में बचे ये गिने-चुने योद्धा इस बात के गवाह बने कि अधर्म का अंत कितना भयानक होता है।

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