Mahabharat: भगवान कृष्ण ने नियम तोड़कर युद्ध के मैदान में उठा लिया था रथ का पहिया, जानें उस अनोखे पल के बारे में

PC: navarashtra
महाभारत सिर्फ़ युद्ध की कहानी नहीं है बल्कि धर्म, नेकी, इज़्ज़त और फ़र्ज़ के बीच संघर्ष की एक बड़ी रचना है। इस महाकाव्य में कई ऐसे पल हैं जब भगवान कृष्ण खुद को मुश्किल दुविधा में पाते हैं। ऐसा ही एक इमोशनल और डरावना पल वह था जब भगवान कृष्ण को अपनी कसम तोड़कर अपने रथ का पहिया उठाकर दुश्मन पर हमला करना पड़ा था। यह घटना सिर्फ़ महाभारत युद्ध की कहानी नहीं है बल्कि यह भी दिखाती है कि धर्म की रक्षा के लिए कभी-कभी नियम तोड़ने पड़ते हैं।
भगवान कृष्ण का क्या वादा था
कुरुक्षेत्र युद्ध शुरू होने से पहले, भगवान कृष्ण ने कसम खाई थी कि वे इस पवित्र युद्ध में हथियार नहीं उठाएंगे। वे सिर्फ़ अर्जुन के सारथी और गाइड का काम करेंगे। दूसरी ओर, कौरवों के सेनापति भीष्म पितामह थे, जिनकी बहादुरी के आगे पांडव सेना हार रही थी।
भीष्म पितामह और पांडवों के सामने आया संकट
कुरुक्षेत्र युद्ध में, भीष्म पितामह ने कौरव पक्ष के सेनापति के तौर पर काम किया। उनकी बहादुरी और लड़ाई का हुनर बेमिसाल था। हर दिन, वे युद्ध के मैदान में पांडव सेना को भारी नुकसान पहुंचा रहे थे। अर्जुन भी पूरी ताकत से भीष्म से नहीं लड़ पा रहा था, क्योंकि भीष्म उसके दादा जैसे थे। अर्जुन की हिचकिचाहट देखकर श्री कृष्ण का मन परेशान हो गया।
पांडव कमजोर पड़ने लगे
जब अर्जुन भीष्म को रोकने में नाकाम रहे और पांडव सेना कम होती जा रही थी, तो श्री कृष्ण को लगा कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो धर्म पक्ष का नाश पक्का है। धर्म की रक्षा के लिए भगवान कृष्ण का गुस्सा फूट पड़ा। उस पल, उन्हें एहसास हुआ कि सिर्फ उपदेश काफी नहीं है; अब काम करना ज़रूरी है।
श्री कृष्ण रथ का पहिया हाथ में लेकर युद्ध के मैदान में दौड़ पड़े
युद्ध के मैदान में, महाभारत को अमर करने वाला सीन सामने आया। भगवान कृष्ण अपना रथ छोड़कर नीचे उतरे, रथ का टूटा हुआ पहिया उठाया और गुस्से से भरे हुए भीष्म पितामह की ओर दौड़े। यह सीन देखकर पूरा युद्ध का मैदान दंग रह गया। खुद भीष्म पितामह ने उस पल को अपनी ज़िंदगी का सबसे पवित्र पल माना।
भीष्म के भावनाएं
श्री कृष्ण को अपने रथ का पहिया लेकर अपनी ओर दौड़ते देख, भीष्म पितामह बहुत खुश हुए। उन्होंने अपना धनुष नीचे रखा और कहा, "आज मेरा जीवन सफल हो गया। भगवान श्री कृष्ण खुद मुझे मारने आए हैं।" लेकिन अर्जुन दौड़े और श्री कृष्ण के पैर पकड़कर उन्हें शांत किया।
अर्जुन ने श्री कृष्ण को रोका
यह सीन देखकर अर्जुन परेशान हो गए। उन्होंने तुरंत कृष्ण के पैर पकड़ लिए और उनसे युद्ध छोड़कर जाने की रिक्वेस्ट की। अर्जुन ने पूरी ताकत से लड़ने और भीष्म को रोकने की कसम खाई। अर्जुन के वादे के बाद, भगवान श्री कृष्ण शांत हुए और अपने रथ पर वापस चले गए। इसलिए, इस पल को महाभारत में सबसे खास माना जाता है।
