पहले दुर्योधन का जहर, फिर नागों ने डसा तो शरीर में फ़ैल गया विष… आखिर कैसे भीम को मिला 10,000 हाथियों का बल? जानें

महाभारत में पांडवों और कौरवों के बीच ईर्ष्या की जड़ें बचपन में ही जम चुकी थीं। पांडु पुत्र भीम अपनी असाधारण शारीरिक शक्ति के कारण कौरवों की आंख की किरकिरी बने हुए थे। इसी ईर्ष्या के वशीभूत होकर दुर्योधन ने बचपन में ही भीम को रास्ते से हटाने का षड्यंत्र रचा।
भोजन में मिला जहर, नदी में फेंके गए भीम
दुर्योधन ने छल से भीम को विषैला भोजन खिला दिया और बेसुध होने पर उन्हें गंगा नदी में बहा दिया। दुर्योधन ने मान लिया था कि भीम का अंत हो चुका है, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। बहते हुए भीम नागलोक पहुंच गए, जहां जहरीले नागों ने उन्हें डसना शुरू कर दिया।
नागों ने भीम को काटा तो क्या हुआ?
कथा के अनुसार, नागों का जहर भीम के शरीर में पहले से मौजूद दुर्योधन के विष के लिए एंटीडोट (जहर को काटने वाला) बन गया। दोनों विष आपस में टकराकर निष्प्रभावी हो गए और भीम को होश आ गया। जब नागराज वासुकि को पता चला कि भीम कुंती-पुत्र हैं, तो उन्होंने उनका भव्य स्वागत किया।
10,000 हाथियों की शक्ति का रहस्य
जब नागों को पता चला कि भीम कुंती के पुत्र और पांडु के पुत्र हैं। नागराज वासुकि ने भीम के साथ विशेष व्यवहार किया। इसी दौरान भीम को एक दिव्य पेय पिलाए जाने का प्रसंग मिलता है। कहा जाता है कि, उस पेय को पीने के बाद भीम के शरीर में असाधारण शक्ति आ गई।
महाभारत की कथा के अनुसार, उन्होंने लगातार आठ कुंडों का दिव्य रस पिया और प्रत्येक कुंड के बाद उनका बल बढ़ता गया. इसीलिए माना जाता है कि, भीम को 10,000 हाथियों के बराबर बल प्राप्त हुआ था।
आठ दिन बाद लौटे हस्तिनापुर
आठ दिनों तक नागलोक में रहने के बाद जब भीम महाबली बनकर हस्तिनापुर लौटे, तो पांडवों में खुशी की लहर दौड़ गई । दूसरी ओर, दुर्योधन को जब पता चला कि भीम जीवित हैं तो उसकी योजना विफल हो गई। इस घटना के बाद पांडव-कौरव संघर्ष और भी गहरा होता गया। महाभारत में भीम को पांडवों में सबसे शक्तिशाली योद्धाओं में गिना जाता है। यही अपार शक्ति आगे चलकर कुरुक्षेत्र के युद्ध में कौरवों के विनाश का कारण बनी।
