धृतराष्ट्र के 100 नहीं, 101 बेटे थे! जानें कौन था युयत्सु? वैश्य महिला ने दिया था जन्म, महाभारत में दिया था पांडवों का साथ

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PC: IN KHABAR

महाभारत की कहानी  हमने कई बार सुनी है जिसमे कौरवों और पांडवों का जिक्र है। जब भी कौरवों की बात होती है तो पहले दुर्योधन, दुशासन और उनके 98 भाइयों का जिक्र होता है। कहा जाता है कि धृतराष्ट्र के 100 बेटे थे। लेकिन, शायद आप ये नहीं जानते हैं कि धृतराष्ट्र के 100 नहीं, बल्कि 101 पुत्र थे? इन 101 में से एक ऐसा भी था, जो कौरव होते हुए भी दुर्योधन की नीतियों से सहमत नहीं था। उसका नाम युयुत्सु था। महाभारत के इस महान युद्ध में युयुत्सु ने अपने ही भाइयों के विरुद्ध जाकर पांडवों का साथ देने का फैसला किया था। आखिर युयुत्सु कौन थे और उन्होंने कौरवों का साथ छोड़कर पांडवों का पक्ष क्यों चुना? जानिए उनके जन्म से लेकर महाभारत के युद्ध तक की पूरी कहानी।

वैश्य महिला से जन्मे थे युयुत्सु
महाभारत के आदि पर्व में इस बारे में जानकारी मिलती है कि धृतराष्ट्र के बेटों का जन्म कैसे हुआ? गांधारी से धृतराष्ट्र के 100 पुत्र और एक पुत्री दुश्शला हुई थीं। वहीं, गांधारी के गर्भवती रहने के दौरान धृतराष्ट्र की सेवा करने वाली एक वैश्य महिला से भी उनका एक पुत्र हुआ, जिसका नाम युयुत्सु रखा गया। युयुत्सु धृतराष्ट्र के 100 कौरव पुत्रों से अलग उनके अतिरिक्त पुत्र थे। वे बेहद ही ताकतवर और पराक्रमी थे। 

 दुर्योधन से अलग थी युयुत्सु की सोच
युयुत्सु का बचपन और परवरिश कौरव राजपरिवार के माहौल में ही हुई, लेकिन विचारों के मामले में वह अपने सौ कौरव भाइयों से अलग थे। दुर्योधन के कई फैसलों और गलत नीतियों से वह सहमत नहीं थे। उन्होंने पांडवों के साथ होते अन्याय को भी करीब से देखा था। ऐसे में जब कुरुक्षेत्र में कौरवों और पांडवों के बीच महायुद्ध की नौबत आई, तब युयुत्सु के सामने एक कठिन निर्णय था—क्या वह रिश्तों के चलते अपने भाइयों का साथ दें या फिर धर्म और न्याय का रास्ता चुनें?

युद्ध शुरू होने से पहले सुनी अपने मन की और बदला पक्ष 

कुरुक्षेत्र युद्ध शुरू होने से ठीक पहले जब युद्ध के लिए कौरव और पांडव आमने सामने थे तो युधिष्ठिर ने घोषणा की कि जो भी व्यक्ति धर्म और न्याय के पक्ष में आना चाहता है, वह पांडवों के साथ आ सकता है। कहा जाता है कि, उस समय युयुत्सु ने आगे बढ़कर पांडवों का साथ चुन लिया। 

युद्ध के बाद जिंदा थे युयुत्सु 
महाभारत के युद्ध में पांडवों ने कौरव वंश को लगभग पूरी तरह समाप्त कर दिया था। दुर्योधन, दुशासन समेत कौरवों के अधिकांश भाई कुरुक्षेत्र के रण में मारे गए, जबकि युयुत्सु उन कुछ कौरवों में शामिल थे जो युद्ध के बाद जीवित बचे। यही बात उनके चरित्र को महाभारत की कथा में खास बनाती है। उनका जन्म कौरव परिवार में हुआ था, लेकिन उनके निर्णय और कर्म उन्हें हमेशा धर्म और न्याय के पक्ष में खड़ा करते नजर आते हैं।

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