क्या फोन में SIM नहीं होने पर WhatsApp बंद हो जाएगा? जानें असल में क्या होगा बदलाव

PC: TV9
WhatsApp पर मैसेज भेजने के लिए अब आपको अपने फ़ोन में वही SIM कार्ड रखना होगा जिससे आपका अकाउंट बना था? क्या दूसरे फ़ोन, टैबलेट या लैपटॉप पर WhatsApp इस्तेमाल करना पहले जितना आसान होगा? भारत में SIM बाइंडिंग का नया नियम ऐसे सवाल खड़े कर रहा है। सरकार का कहना है कि इस कदम से साइबर फ्रॉड पर रोक लगेगी। हालांकि, एक नई स्टडी कहती है कि इससे आम आदमी और छोटे व्यापारियों के लिए कई दिक्कतें खड़ी होंगी।
ज़्यादातर छोटे व्यापारियों को डर है कि इस नियम से उनके रोज़ाना के काम में रुकावट आ सकती है। कई लोगों को यह भी यकीन नहीं है कि सिर्फ़ SIM को फ़ोन से लिंक करने से मैसेजिंग ऐप पहले से ज़्यादा सुरक्षित हो जाएगा। तो ये नए सरकारी नियम WhatsApp, Telegram और Signal जैसे ऐप्स के इस्तेमाल के तरीके को कैसे बदल सकते हैं?
SIM बाइंडिंग नियम क्या है और इसे कब लागू किया जाएगा?
डिपार्टमेंट ऑफ़ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) ने नवंबर 2025 में WhatsApp, Telegram, Signal, Snapchat, Arattai, ShareChat, Josh और JioChat जैसे ऐप्स के लिए SIM बाइंडिंग से जुड़ी गाइडलाइंस जारी की हैं। ये ऐप्स यूज़र की पहचान उनके मोबाइल नंबर से करते हैं। सरकार का कहना है कि कुछ लोग फ़ोन में SIM कार्ड न होने पर भी इन ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका गलत इस्तेमाल विदेश से साइबर फ्रॉड करने के लिए किया जा सकता है।
नए नियमों के मुताबिक, संबंधित ऐप्स को यह पक्का करना होगा कि अकाउंट से जुड़ा एक्टिव SIM उसी फ़ोन में हो जिस पर ऐप चलाया जा रहा है। सरकार ने कंपनियों को नियमों का पालन करने के लिए 31 दिसंबर, 2026 तक का समय दिया है। कहा जा रहा है कि नए नियमों का असर 1 जनवरी, 2027 से दिखना शुरू हो जाएगा।
इसका मतलब यह नहीं है कि 1 जनवरी से WhatsApp अचानक सभी के लिए बंद हो जाएगा। असली बदलाव इस बात पर निर्भर करेगा कि ऐप कंपनियां नियमों को कैसे लागू करती हैं। और फ़ोन में SIM होने का पता कैसे चलेगा।
…तो क्या WhatsApp बंद हो जाएगा?
नए नियमों का सबसे सीधा असर उन लोगों पर पड़ सकता है। जो SIM एक फ़ोन में रखते हैं, लेकिन WhatsApp दूसरे फ़ोन में चलाते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आपका WhatsApp नंबर एक फ़ोन में है। और आप उसी नंबर से अकाउंट दूसरे फ़ोन में चलाते हैं, जिसमें SIM नहीं है। फिर नए नियमों से उसी फ़ोन पर ऐप्स चलाने में दिक्कत हो सकती है।
इसी तरह, जो लोग पुराने फ़ोन या टैबलेट पर मैसेजिंग ऐप्स इस्तेमाल करते हैं जो सिर्फ़ Wi-Fi से काम करते हैं। उन्हें अपनी आदतें बदलनी पड़ सकती हैं। हालांकि, लिंक किए गए डिवाइस के फ़ीचर्स और अलग-अलग ऐप्स के नियमों को समझना ज़रूरी है। हर डिवाइस पर ऐप्स चलाने का तरीका एक जैसा नहीं होता।
