इस महिला ने अपनी मां के साथ किया देश भर की सैर, जानिए क्या है कारण

 
यात्रा

लड़कियां अक्सर अपनी यात्रा किसी ना किसी वजह से रद्द कर देती है। क्योंकि उनके पीछे सैकड़ों समस्याएं, जिम्मेदारियां, सामाजिक चेतना, सुरक्षा और बहुत कुछ है। हालांकि, इन सब पर काबू पाने के बाद कुछ लोग बिना किसी झिझक के सोलो ट्रिप कर लेते हैं। कुछ लोग दस में से दोस्त बनाकर योजना बनाते हैं। हालांकि, हमारा एक दोस्त है जिसने अपनी मां को अपना दोस्त बनाया और अलग-अलग जगहों की यात्रा का आनंद लिया। उसका नाम वृषाली महाजन है। 

यात्रा


वृषाली उल्हासनगर में रहती है। सौंदर्य प्रसाधन के क्षेत्र में काम करता है। उसे शुरू से ही चलना पसंद था। हालांकि, उनके पिता का निधन कम उम्र में ही हो गया था। घर की जिम्मेदारी मां पर आ गई। यह जानकर वृषाली ने कभी भी अपनी मां के पास जाने की जिद नहीं की। वह समाचार पत्र, पत्रिकाएं, टीवी, किताबें और पर्यटन क्षेत्र के बारे में जानकारी पढ़ती थीं। एक बार जब वह कॉलेज में थी, उसने एक प्रतिष्ठित पर्यटन कंपनी की एक महिला विशेष गोवा यात्रा देखी। उसने बिना रुके अपनी माँ को विज्ञापन दिखाया। कम उम्र में ही जिम्मेदारी से अभिभूत मां ने यात्रा पर जाने के लिए हामी भर दी ताकि उनकी बेटी एक आरामदायक जीवन जी सके। आकाश बैल पर गिर रहा था। क्योंकि उनकी हवाई यात्रा की पहली लहर भी पर्यटन की दृष्टि से सुखद अनुभव की पहली लहर थी। 

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यात्रा में सभी उम्र की महिलाओं ने भाग लिया। वृषभ उनमें से एक बन गया। घर-द्वार-जगत को पीछे छोड़कर सभी तितली की तरह उड़ रहे थे। इनमें एक बच्ची भी थी जो अपने बच्चे को लेकर आई थी। करीब आने पर पता चला कि उसके पति की अभी-अभी मौत हुई है। वह उस दुख को भूलने और जीवन में सकारात्मक शुरुआत करने के लिए यात्रा में शामिल हुई थी। उसे देखकर वृषाली को अपनी मां की याद आई। उस लड़की की तरह उसे भी लगा कि उसकी माँ को उसकी ज़िम्मेदारियों से मुक्त करके अपने लिए समय निकालना चाहिए। लेकिन मां कभी अपने लिए समय नहीं निकालती। इस बात को ध्यान में रखते हुए वृषाली अपनी मां को अपनी पहली वैष्णव देवी यात्रा पर ले गई। 

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