Sleep: फायदा नहीं, सिर्फ है नुकसान! ज़्यादा सोने से इन बिमारियों का बढ़ जाता है खुलासा, रिसर्च में हुआ खुलासा

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नींद हम सभी के लिए ज़रूरी है। पर्याप्त नींद लेना बेहद जरूरी है ये शरीर के लिए दवा के समान है। हालाँकि, एक हालिया अध्ययन के अनुसार, बहुत ज़्यादा सोना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी हो सकता है। शोधकर्ताओं ने 79 पुराने अध्ययनों की समीक्षा की, जिनमें लोगों की नींद की आदतों और उनके स्वास्थ्य पर कम से कम एक साल तक नज़र रखी गई थी।
नींद और मृत्यु के जोखिम के बीच संबंध
इस अध्ययन में पाया गया कि जो लोग प्रतिदिन 7 घंटे से कम सोते हैं, उनमें मृत्यु का जोखिम 14 प्रतिशत बढ़ जाता है। हालाँकि, आश्चर्यजनक रूप से, जो लोग 9 घंटे से ज़्यादा सोते हैं, उनमें मृत्यु का जोखिम 34 प्रतिशत ज़्यादा होता है। 2018 में किए गए एक बड़े अध्ययन में भी इसी तरह का निष्कर्ष सामने आया था।
बहुत ज़्यादा नींद और स्वास्थ्य के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है। हालाँकि, इसका संबंध कई बीमारियों से पाया गया है। जिनमें अवसाद, मोटापा, पुराना दर्द, चयापचय संबंधी समस्याएं जैसी स्वास्थ्य समस्याएं शामिल हैं।
अत्यधिक नींद के जोखिम
हृदय रोग का खतरा बढ़ाता है
जो लोग बहुत ज़्यादा सोते हैं, उनमें हृदय रोग, दिल का दौरा और स्ट्रोक का खतरा ज़्यादा होता है। 9 घंटे से ज़्यादा सोने से रक्तचाप और हृदय गति में अनियमितता हो सकती है, जिसका सीधा असर हृदय स्वास्थ्य पर पड़ता है।
अवसाद का बढ़ता जोखिम
अत्यधिक नींद भी अवसाद का एक लक्षण हो सकती है और अवसाद को और भी बदतर बना सकती है। जो लोग बहुत ज़्यादा सोते हैं, उन्हें अक्सर थकान, काम में रुचि की कमी और निराशा का अनुभव होता है। नींद में यह अनियमितता शरीर के हार्मोन और जैविक घड़ी को बाधित करती है, जिससे अवसाद और भी बदतर हो जाता है।
वजन बढ़ना और मोटापा
अत्यधिक नींद शरीर की गतिशीलता को कम करती है। इससे शारीरिक गतिविधि में कमी और खान-पान की खराब आदतें पैदा होती हैं। साथ ही, अनियमित नींद की अवधि के कारण चयापचय और भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन अनियंत्रित हो जाते हैं। इससे वजन बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है।
पुराना दर्द
नींद शरीर को आराम देती है, लेकिन बहुत ज़्यादा सोने से पीठ दर्द, गठिया या मांसपेशियों में दर्द बढ़ सकता है। लंबे समय तक बैठे रहने से जोड़ अकड़ सकते हैं। इससे मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है। साथ ही, अत्यधिक नींद शरीर में सी-रिएक्टिव प्रोटीन (सीआरपी) के स्तर को बढ़ा देती है।
डिमेंशिया का खतरा
हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, अत्यधिक नींद बुजुर्गों में डिमेंशिया और अल्जाइमर के खतरे को बढ़ा सकती है। लंबे समय तक सोने से मस्तिष्क की संरचना में बदलाव आ सकते हैं और तंत्रिका संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इस पर और अधिक शोध की आवश्यकता है।
