500 रुपये के नोटों का दबदबा, लेकिन 200 रुपये का नोट पड़ा कमजोर; जानें RBI रिपोर्ट में असल में क्या है?

RBI की रिपोर्ट से पता चला है कि देश में 500 रुपये के नोटों का इस्तेमाल और डिमांड तेज़ी से बढ़ी है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के ताज़ा डेटा के मुताबिक, अभी सर्कुलेशन में कुल करेंसी में 500 रुपये के नोटों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है, जो 86 परसेंट है।
हालांकि, 200 और 100 रुपये के नोटों का मार्केट शेयर कम हो रहा है। 2000 रुपये के नोट बंद होने के बाद, लोगों ने बड़े ट्रांज़ैक्शन और खरीदारी के लिए 500 रुपये के नोटों को ज़्यादा पसंद किया है। चूंकि बैंक ATM अब 500 रुपये के नोट ज़्यादा दे रहे हैं, इसलिए 200 रुपये का नोट धीरे-धीरे मार्केट में कम दिख रहा है।
RBI ने 100 और 500 रुपये की डिमांड को पूरा करने के लिए 200 रुपये के नोट शुरू किए थे। लेकिन अब यह नोट मार्केट में सबसे कम दिख रहा है। RBI के ताज़ा डेटा के मुताबिक, 200 रुपये का नोट अब सबसे कमज़ोर हो गया है। सर्कुलेशन में कुल नोटों में 200 रुपये का हिस्सा सिर्फ़ 6.13 परसेंट है। जबकि 500 रुपये का नोट मार्केट का किंग बन गया है। RBI की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में अभी 176.55 बिलियन नोट सर्कुलेशन में हैं। लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से 500 रुपये के नोट 41.25 परसेंट हैं।
200 रुपये का नोट सिर्फ 6.13 परसेंट शेयर के साथ पीछे है। वहीं, 100 रुपये के नोट 16.03 परसेंट शेयर के साथ मार्केट में बड़ी संख्या में हैं। 10 रुपये के नोट 15.94 परसेंट शेयर के साथ सर्कुलेशन में हैं। 200 रुपये का नोट जितनी तेजी से आया था, उतनी ही तेजी से गायब भी हो गया। ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन के स्टेट वाइस प्रेसिडेंट प्रवीण मिश्रा का कहना है कि मार्केट ने 200 रुपये के नोट को वह जगह नहीं दी है, जो मिलनी चाहिए। लोग 100 रुपये के नोट को छोटे ट्रांजैक्शन के लिए ज्यादा आसान मानते हैं, जबकि 500 रुपये के नोट का इस्तेमाल बड़ी खरीदारी या ट्रांजैक्शन के लिए सबसे ज्यादा होता है। इस वजह से 200 रुपये का नोट दोनों में अपनी पहचान नहीं बना पाया है। डिजिटल पेमेंट भी सीमित
इकॉनमिक एक्सपर्ट अंकुर गोयल का कहना है कि ATM से ज़्यादातर 100 और 500 रुपये के नोट मिलते हैं। ट्रेडर्स के मुताबिक, इन नोटों से ज़्यादा ट्रांज़ैक्शन होते हैं। 200 रुपये का नोट अब कम इस्तेमाल हो रहा है। डिजिटल पेमेंट के इस्तेमाल में तेज़ी से बढ़ोतरी ने भी इसकी उपयोगिता को सीमित कर दिया है।
200 रुपये का नोट सबसे पहले 25 अगस्त, 2017 को जारी किया गया था। उस समय 100 और 500 रुपये के नोटों के बीच की कमी को पूरा करने के लिए 200 रुपये का नोट लाया गया था। SBI के रिटायर्ड अधिकारी आर. सी. शुक्ला का कहना है कि जब 200 रुपये का नोट आया था, तो उम्मीद थी कि यह छोटे और मीडियम ट्रांज़ैक्शन के लिए सबसे उपयोगी नोट होगा। लेकिन कुछ ही सालों में इसका वजूद कमज़ोर हो गया है। अगर ATM, बैंकों और बाज़ार में 200 रुपये के नोट की उपलब्धता और इस्तेमाल नहीं बढ़ा, तो भविष्य में इसकी हिस्सेदारी और कम हो सकती है।
