WhatsApp के SIM-बाइंडिंग नियम पर सवाल; क्या विदेश जाने पर मैसेजिंग सर्विस बंद हो जाएगी? बिज़नेस पर भी पड़ सकता है असर

PC: NAVRASHTRA
एशिया सेंटर के एक सर्वे ने चिंता जताई है कि टेलीकॉम डिपार्टमेंट के SIM-बाइंडिंग डायरेक्टिव से WhatsApp जैसे मैसेजिंग ऐप इस्तेमाल करने वाले कंज्यूमर्स को परेशानी हो सकती है और छोटे और मीडियम बिजनेस की लागत बढ़ सकती है। स्टडी से पता चलता है कि यह सिस्टम साइबर फ्रॉड को रोकने में कुछ खास मदद नहीं करेगा। SIM-बाइंडिंग का मतलब है कि मैसेजिंग ऐप अकाउंट के साथ रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर का SIM कार्ड संबंधित मोबाइल फोन में डालना होगा और एक्टिव रखना होगा। इसका मकसद यह पक्का करना है कि ऐप इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति का उस मोबाइल नंबर और SIM कार्ड पर कंट्रोल हो।
'भारत के SIM-बाइंडिंग मैंडेट पर फिर से सोचना: एक एम्पिरिकल असेसमेंट' नाम की यह स्टडी भारत के 18 शहरों में 2,033 कंज्यूमर्स और 17 शहरों में 353 बिजनेस के सर्वे पर आधारित है। नवंबर 2025 में, टेलीकम्युनिकेशन डिपार्टमेंट (DoT) ने इंटरनेट-बेस्ड मैसेजिंग ऐप कंपनियों को अपने रजिस्टर्ड SIM कार्ड से यूज़र अकाउंट को लिंक रखने का निर्देश दिया था। शुरुआती निर्देश में हर छह घंटे में वेब ऐप सेशन को ऑटोमैटिकली खत्म करने का प्रावधान था। बाद में इसमें बदलाव करके रिस्क के आधार पर सेशन को खत्म करने की इजाज़त दी गई।
विदेश में दिक्कतें
सर्वे के मुताबिक, SIM-बाइंडिंग, यानी मैसेजिंग ऐप अकाउंट से जुड़े SIM कार्ड को अपने मोबाइल फ़ोन में एक्टिव रखना, लोगों के लिए दिक्कतें खड़ी कर सकता है, खासकर विदेश यात्रा के दौरान। सर्वे में शामिल सिर्फ़ 33 परसेंट लोग ही भारतीय SIM कार्ड पर रोमिंग फ़ीचर का इस्तेमाल करते हैं। जबकि, 67.1 परसेंट लोग विदेश में लोकल SIM कार्ड, सिर्फ़ Wi-Fi या दूसरे SIM कार्ड का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए, अगर मोबाइल फ़ोन से रजिस्टर्ड भारतीय SIM कार्ड के डीएक्टिवेट होने या हटाने की वजह से मैसेजिंग सर्विस काम करना बंद कर देती हैं, तो लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
97 परसेंट लोगों को मुश्किलें
सर्वे में शामिल 97.7 परसेंट लोगों ने कहा कि उन्हें किसी दूसरे डिवाइस पर ऐप इस्तेमाल करते समय अपने आप लॉग आउट करने में मुश्किल होगी। इसी तरह, 97 परसेंट ने कहा कि यात्रा के दौरान भारतीय SIM कार्ड से बार-बार लॉग इन करना मुश्किल होगा। स्टडी में कहा गया है कि अगर ‘SIM-बाइंडिंग’ नियम दूसरे डिवाइस पर मैसेजिंग ऐप के इस्तेमाल पर रोक लगाता है, तो इससे बिज़नेस ऑपरेशन पर असर पड़ सकता है। सर्वे में शामिल लगभग 78 परसेंट बिज़नेस इस बात से सहमत थे कि इस तरह की रोक से उनके ऑपरेशन पर कुछ हद तक असर पड़ेगा।
