Question: 'मैं दो बार प्रेग्नेंट हुई लेकिन दोनों बार अबॉर्शन पिल ली, अब मैं बच्चा पैदा नहीं कर सकती', डॉक्टर ने वजह बताई

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कभी-कभी महिलाएं अनचाही प्रेग्नेंसी को खत्म करने के लिए पिल्स का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन इस दौरान बहुत सावधान रहना ज़रूरी है। सही मेडिकल देखरेख भी ज़रूरी है, क्योंकि छोटी सी गलती भी आगे की प्रेग्नेंसी में दिक्कतें ला सकती है। फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉ. महिमा के पास हाल ही में ऐसा ही एक केस आया। एक 27 साल की महिला दो बार प्रेग्नेंट हुई और उसने दोनों बार अबॉर्शन पिल्स लीं।
इसके बाद जब महिला ने दोबारा कंसीव करने की कोशिश की, तो वह प्रेग्नेंट नहीं हो पाई। महिला की प्रॉब्लम सुनने के बाद डॉक्टर ने केस की पूरी हिस्ट्री जानी और तब जाकर असली प्रॉब्लम सामने आई। लेकिन आइए जानते हैं कि असल में यह प्रॉब्लम क्या थी और आजकल महिलाएं ऐसी प्रॉब्लम का सामना कैसे कर सकती हैं।
पिछले दो सालों से कंसीव करने की इस कपल की कोशिश
एक इंस्टाग्राम वीडियो में फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉ. महिमा बताती हैं कि हाल ही में एक 27 साल का कपल उनके पास कंसल्टेशन के लिए आया था। कपल की शादी को छह साल हो गए थे और वे पिछले दो सालों से कंसीव करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्हें हर बार निराशा ही हाथ लगी। कई कोशिशों के बाद भी महिला प्रेग्नेंट नहीं हो पाई, जिससे कपल को मेंटल स्ट्रेस हो गया।
दो बार प्रेग्नेंट हुई
एक्सपर्ट्स ने बताया कि जब कपल की मेडिकल हिस्ट्री चेक की गई, तो पता चला कि महिला पहले भी दो बार प्रेग्नेंट हो चुकी थी और दोनों बार उसने MTP पिल्स ली थीं। पहली बार पिल्स लेने के बाद थोड़ी देर के लिए ब्लीडिंग हुई, फिर ब्लीडिंग अपने आप बंद हो गई और महिला की लाइफ नॉर्मल हो गई।
दूसरी बार पिल्स लेने के बाद भी ब्लीडिंग नहीं रुकी
गायनेकोलॉजिस्ट के मुताबिक, जब महिला दूसरी बार प्रेग्नेंट हुई, तो उसने प्रेग्नेंसी अबॉर्ट करने के लिए MTP पिल्स लीं। लेकिन इस बार सिचुएशन अलग थी, क्योंकि ब्लीडिंग रुकने के बजाय लगभग दो महीने तक चलती रही। परेशान महिला ने कई डॉक्टरों से कंसल्ट किया। कई तरह के स्कैन और टेस्ट किए, लेकिन रिपोर्ट्स में कोई बड़ी प्रॉब्लम नहीं मिली और सब कुछ नॉर्मल निकला। पति-पत्नी की रिपोर्ट नॉर्मल थी
एक्सपर्ट्स ने आगे बताया कि दूसरी बार ब्लीडिंग बंद होने के करीब एक साल बाद, जब महिला ने दोबारा कंसीव करने की कोशिश की, तो वह प्रेग्नेंट नहीं हो पाई। हैरानी की बात है कि पति-पत्नी दोनों की रिपोर्ट नॉर्मल थी। सभी ज़रूरी टेस्ट नॉर्मल आए, लेकिन फिर भी कपल कंसीव नहीं कर सका।
असल में प्रॉब्लम क्या थी
डॉक्टर बताती हैं कि उन्हें असली वजह तभी पता चली जब उन्होंने महिला की पूरी हिस्ट्री ध्यान से सुनी और उसे उसकी पिछली प्रेग्नेंसी के दौरान हुई घटनाओं से जोड़ा। असल में, पिछली प्रेग्नेंसी को खत्म करने के लिए गोली लेने के बाद हुई लंबी ब्लीडिंग के दौरान महिला को एंटीबायोटिक्स दी गई थीं, लेकिन उसका यूट्रस पूरी तरह से ठीक नहीं हो सका। यह अंदरूनी प्रॉब्लम उसकी बाद की प्रेग्नेंसी पर असर डालती रही। अबॉर्शन के बाद का इन्फेक्शन एक बड़ी प्रॉब्लम थी।
पोस्ट-अबॉर्शन इन्फेक्शन असल में क्या है
एक्सपर्ट बताते हैं कि यह कंडीशन, जिसे पोस्ट-अबॉर्शन इन्फेक्शन के नाम से जाना जाता है, एंडोमेट्रियम की अंदर की लेयर को डैमेज कर देती है। हालांकि अल्ट्रासाउंड में यूट्रस पूरी तरह से हेल्दी दिखता है और महिला का पीरियड्स का साइकिल रेगुलर रहता है, लेकिन अंदर की लेयर डैमेज हो जाती है। इसी वजह से प्रेग्नेंसी नहीं बच पाती। डॉक्टर ने पहले इस प्रॉब्लम का इलाज किया ताकि वह भविष्य में कंसीव कर सके।
