PCOS: सावधान! पतली लड़कियों को भी हो सकती है यह गंभीर बीमारी; ये लक्षण दिखें तो तुरंत जाएं डॉक्टर के पास!

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पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम, एक गंभीर बीमारी है, जिससे कई महिलाएं परेशान हैं। इस बीमारी की गंभीरता को देखते हुए मई 2026 से इसका नाम बदल दिया गया है। अब इस बीमारी का नाम PCOS से बदलकर PMOS कर दिया गया है। यह बीमारी भारत में लगभग 11.3 प्रतिशत महिलाओं को प्रभावित करती है। यानी, 9 में से एक महिला को यह बीमारी है। वहीं, यह बीमारी सिर्फ यूट्रस तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर शरीर के मेटाबॉलिज्म पर पड़ता है।
'लीन PCOS' क्या है?
तो एक बड़ी गलतफहमी है कि PCOS सिर्फ मोटी महिलाओं को होता है। नॉर्मल वज़न और BMI वाली महिलाओं को भी यह बीमारी हो सकती है। मेडिकल भाषा में इसे लीन PCOS भी कहते हैं। वहीं, नॉर्मल वज़न वाली महिलाएं इस बीमारी को नज़रअंदाज़ कर देती हैं, जिससे इलाज में देरी होती है।
इस बीमारी के ज़रूरी लक्षण क्या हैं?
कई महीनों तक पीरियड्स का अनियमित होना या न आना। चेहरे और शरीर पर बालों का बढ़ना। चेहरे पर पिंपल्स और सिर के बालों का झड़ना। इनफर्टिलिटी और प्रेग्नेंसी में बार-बार दिक्कतें आना। लगातार थकान, मूड स्विंग और डिप्रेशन।
इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा
इस बीच, “लीन PCOS का सबसे बड़ा खतरा इंसुलिन रेजिस्टेंस है। इसमें शरीर के सेल्स इंसुलिन पर रिस्पॉन्ड नहीं करते। इस वजह से खून में इंसुलिन बढ़ जाता है। नतीजतन, महिलाओं की ओवरी में एंड्रोजन (सेक्स हार्मोन) बढ़ जाते हैं। बाहर से कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। यह बीमारी प्रीडायबिटीज और बाद में टाइप 2 डायबिटीज में बदल सकती है,” डॉ. पलक दीवान ने कहा।
इस बीमारी का पता असल में कैसे चलता है?
इस बीमारी का पता लगाने के लिए, सिर्फ बाहरी लक्षणों पर ध्यान देना ही ज़रूरी नहीं है, बल्कि इस समय मेडिकल टेस्ट करवाना भी ज़रूरी है। इसमें समय-समय पर ब्लड टेस्ट, फास्टिंग ग्लूकोज, इंसुलिन लेवल, हार्मोन प्रोफाइल और पेल्विक अल्ट्रासाउंड स्कैन शामिल हैं। अगर इस बीमारी का समय पर पता चल जाए, तो आगे होने वाली दिक्कतों से बचा जा सकता है।
