Laxmi Pujan 2026: दिवाली पर करें नारियल से जुड़ा ये अचूक उपाय, घर में बनी रहेगी लक्ष्मी की कृपा

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सनातन धर्म में दिवाली का त्योहार सुख, समृद्धि और धन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली की रात कुछ खास पूजा-पाठ करने से घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है। अगर आप भी इस दिवाली देवी लक्ष्मी की कृपा पाना चाहते हैं, तो ज्योतिषियों द्वारा बताए गए इन उपायों को जान सकते हैं। आइए इस आर्टिकल में इनके बारे में विस्तार से जानते हैं।
दिवाली की रात देवी लक्ष्मी की पूजा का महत्व
अयोध्या के ज्योतिषी पंडित कल्कि राम बताते हैं कि दिवाली की रात देवी लक्ष्मी की पूजा का खास महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन देवी लक्ष्मी की कृपा पाने से सुख, शांति और समृद्धि आती है। इसलिए, भक्त पूजा-पाठ के साथ कुछ पारंपरिक रस्में भी करते हैं।
दिवाली से एक दिन पहले यह उपाय आजमाएं
पंडित कल्कि राम के अनुसार, दिवाली से एक दिन पहले एक सूखा नारियल छिलकों सहित लेकर उसे किसी साफ और सुरक्षित जगह पर रख दें। नारियल को बहते पानी या तालाब में डाल दें। मान्यता के अनुसार, यह रस्म करते समय मन में देवी लक्ष्मी का आह्वान करें और अगली शाम नारियल लाने का संकल्प लें। इस दौरान शांत रहें। दिवाली की शाम को सूरज डूबने पर, एक नया लाल सूती कपड़ा लें और नारियल के पास जाएं।
पंचोपचार पूजा और नारियल घर लाना
सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करते हुए ‘ॐ श्री गणेशाय नमः’ मंत्र का जाप करें। फिर देवी लक्ष्मी का ध्यान करते हुए नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर घर ले आएं। उसके बाद घर में दीया जलाएं और नारियल को भगवान गणेश और लक्ष्मी की मूर्तियों के पास रखकर पंचोपचार पूजा करें। धूप, दीप, फूल, इत्र और प्रसाद चढ़ाकर सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। ऐसा करने से देवी लक्ष्मी की विशेष कृपा मिलती है।
तिजोरी की पूजा का भी है खास महत्व
ज्योतिष के अनुसार, दिवाली के दिन कोष या उस जगह की पूजा करना शुभ माना जाता है जहां आप अपने पैसे रखते हैं। पूजा के बाद, उस जगह पर नारियल रखने का रिवाज है जहां आप अपने पैसे रखते हैं। माना जाता है कि इससे घर में खुशहाली आती है और देवी लक्ष्मी की कृपा होती है। इसके अलावा, दिवाली की शाम को 108 बार गोपाल सहस्रनाम या संतान गोपाल सहस्रनाम का पाठ करना भी धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार यह अनुष्ठान कर सकते हैं।
