Land Record: अब आपकी ज़मीन का भी होगा आधार कार्ड ; नक्शा, रजिस्ट्रेशन और कोर्ट केस की जानकारी मिलेगी एक ही जगह पर

pc: cmv360
ज़मीन खरीदने वालों और किसानों के लिए ज़रूरी खबर है। अब सरकार ने ज़मीन के रिकॉर्ड को डिजिटल और सिस्टमैटिक बनाने के लिए एक बड़ा सिस्टम शुरू किया है। सरकार ने सबकी ज़मीन का रिकॉर्ड रखने के लिए एक नई स्कीम शुरू की है। डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइज़ेशन प्रोग्राम के तहत, ग्रामीण से लेकर शहरी इलाकों तक सभी ज़मीनों का रिकॉर्ड रखा जाएगा। DILRMP के तीसरे फ़ेज़ के लिए पूरी गाइडलाइंस जारी कर दी गई हैं।
DILRMP 3.0 स्कीम के लिए 2026-31 के समय में 565.5 करोड़ रुपये का फ़ंड मंज़ूर किया गया है। इस स्कीम का मकसद ज़मीन के रिकॉर्ड, मैप, रजिस्ट्रेशन और उससे जुड़ी जानकारी को GIS-बेस्ड डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर लाना है। हर प्लॉट को 14 अंकों का डिजिटल आइडेंटिफ़िकेशन नंबर देने की तैयारी की गई है। इसे यूनिवर्सल लैंड पार्सल आइडेंटिफ़िकेशन नंबर (ULPIN) या आसान शब्दों में 'भू-आधार' कहा जा रहा है।
यह नया सिस्टम ज़मीन के मैप, ओनरशिप रिकॉर्ड, रजिस्ट्री और ज़मीन से जुड़ी दूसरी ज़रूरी जानकारी को डिजिटली लिंक करने की कोशिश करेगा। इससे ज़मीन खरीदने से पहले पुरानी जानकारी चेक करना आसान हो जाएगा। अभी ज़मीन से जुड़ी जानकारी अलग-अलग जगहों पर मिलती है। ज़मीन का प्लॉट नंबर रेवेन्यू डिपार्टमेंट के रिकॉर्ड में होता है। ज़मीन का मैप अलग जगह पर हो सकता है, जबकि ज़मीन की खरीद-बिक्री की जानकारी रजिस्ट्रेशन ऑफिस में मिलती है। इसके अलावा, ज़मीन पर कोई लोन है या नहीं? कोई झगड़ा चल रहा है या कोर्ट में कोई केस है?, इसकी जानकारी भी अलग-अलग सिस्टम में मिल सकती है। इसलिए, ज़मीन खरीदने वाले व्यक्ति को सारी जानकारी एक साथ पाने के लिए कई डॉक्यूमेंट जमा करने पड़ते हैं और ऑफिसों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
सरकार अब इस सारी जानकारी को एक डिजिटल पहचान से जोड़ने की कोशिश कर रही है। हर प्लॉट को 14 अंकों का ULPIN दिया जाएगा। भू-आधार नंबर मिलने के बाद, संबंधित ज़मीन का डिजिटल मैप, लैंड टाइटल रिकॉर्ड और रजिस्ट्री से जुड़ी जानकारी एक साथ देखने का इंतज़ाम किया जाएगा। इससे कागज़ पर बने ज़मीन के मैप को असली ज्योग्राफिकल लोकेशन से जोड़ने में मदद मिलेगी। यह देखना भी आसान हो सकता है कि कागज़ पर बना प्लॉट असल में कहाँ है और उसकी बाउंड्री क्या हैं। ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गाइडलाइंस जारी करते हुए इसे लैंड मैनेजमेंट को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। सबसे ज़रूरी बदलाव अलग-अलग जगहों पर मौजूद लैंड रिकॉर्ड को एक साथ लाना होगा। इससे किसानों को इंस्टीट्यूशनल लोन मिलना आसान हो जाएगा और बार-बार ऑफिस जाने की ज़रूरत खत्म हो जाएगी।
