HRA Rules : सरकारी कर्मचारियों के लिए HRA नियमों में बड़ा बदलाव, सैलरी में सीधे बढ़ोतरी होगी या असर पड़ेगा? जानें क्या बदला है

PC: Money9
सेंट्रल गवर्नमेंट के कर्मचारियों को हाउस रेंट अलाउंस (HRA) मिलता है। लेकिन सिर्फ़ इसलिए कि वे किराए के घर में रहते हैं, उन्हें HRA नहीं मिलता। HRA क्लेम करते समय कर्मचारियों को कुछ ज़रूरी शर्तें पूरी करनी होती हैं। इसलिए, HRA लेने वाले कर्मचारियों को इन नियमों के बारे में पता होना ज़रूरी है।
HRA क्लेम करते समय कर्मचारी को यह बताना होता है कि वह जिस घर में रहता है, वह उसका अपना है, उसके पति या पत्नी, बच्चों या माता-पिता का है या किराए का है। इसके लिए कर्मचारी को कुछ ज़रूरी सर्टिफिकेट भी जमा करने होते हैं।
अगर सरकारी घर मिला है तो HRA नहीं?
मान लीजिए, अगर किसी कर्मचारी को सरकारी घर मिला है, अगर वह उसके माता-पिता या बच्चे को सेंट्रल या स्टेट गवर्नमेंट ने मुफ़्त में दिया है, तो उस समय के लिए HRA नहीं लिया जा सकता। यह नियम किसी सरकारी संस्था, ऑटोनॉमस संस्था या दूसरी सरकारी संस्था से मिले घर पर भी लागू होता है।
साथ ही, अगर कर्मचारी के पति या पत्नी को उसी शहर में सरकारी घर मिला है, तो उसकी जानकारी देना ज़रूरी है। अगर आप अपने पति, पत्नी, बच्चों या माता-पिता के साथ सरकारी घर में रह रहे हैं, तो आप उसके लिए HRA क्लेम नहीं कर सकते।
ट्रांसफर के बाद भी नियम लागू होते हैं
HRA के नियम तब भी बदल सकते हैं जब किसी कर्मचारी का ट्रांसफर होता है या उसकी पोस्टिंग बदलती है। अगर आप ट्रांसफर के बाद कुछ समय के लिए सरकारी रेस्ट हाउस, स्टेट भवन या डिपार्टमेंटल गेस्ट हाउस में रहते हैं और किराए का रीइंबर्समेंट लेते हैं, तो उस समय के लिए HRA नहीं मिलता है। सरकारी घर मिलने के बाद भी, HRA आमतौर पर बंद कर दिया जाता है।
HRA के टैक्स बेनिफिट्स पर भी ध्यान दें
HRA की पूरी रकम टैक्स-फ्री नहीं होती है। पुराने टैक्स सिस्टम में सेक्शन 10(13A) के तहत HRA टैक्स डिडक्शन मिलता है। नए टैक्स सिस्टम में यह डिडक्शन नहीं मिलता है। इसलिए, कर्मचारियों को असली किराए की रसीदें, पेमेंट रिकॉर्ड और उससे जुड़े डॉक्यूमेंट्स संभाल कर रखने चाहिए। HRA टैक्स डिडक्शन गलत तरीके से लेने पर ब्याज के साथ ज़्यादा टैक्स देना पड़ सकता है।
