पीरियड्स कितने दिन लेट होना नॉर्मल माना जाता है? रेगुलर पीरियड्स पाने के लिए अपनाएं ये आसान टिप्स

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पीरियड्स महिलाओं के शरीर में होने वाला एक नेचुरल प्रोसेस है। महीने में 4 से 5 दिन महिलाओं के शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं। इन बदलावों के असर से महिलाओं को पीरियड्स के दौरान शारीरिक और मानसिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। पीरियड्स कोई फिजिकल एक्टिविटी नहीं बल्कि महिलाओं के शरीर का आईना है। पीरियड्स का साइकिल 21 से 35 दिनों का होता है। कुछ महिलाओं को पीरियड्स जल्दी आते हैं जबकि कुछ को ड्यू डेट से बहुत देर से आते हैं। हर महिला के शरीर में हर समय कुछ न कुछ बदलाव होते रहते हैं। पीरियड्स का समय पर आना अच्छी सेहत की निशानी है। लेकिन अक्सर शरीर में होने वाले छोटे और नॉर्मल बदलाव खतरनाक नहीं होते। इसीलिए आज हम आपको डिटेल में बताएंगे कि पीरियड्स कितने दिन लेट होने को नॉर्मल मानना ​​चाहिए? पीरियड्स समय पर लाने के लिए कौन से टिप्स फॉलो करने चाहिए? आइए जानते हैं।

पीरियड्स कितने दिन देर से आना नॉर्मल माना जाता है?
अक्सर पीरियड्स तय तारीख पर नहीं आते, कभी-कभी बहुत देर से आते हैं। वैसे तो हर महीने पीरियड्स देर से आना नॉर्मल है, लेकिन कभी-कभी यह शरीर में बड़े बदलावों का संकेत होता है। अगर पीरियड्स हर महीने 2 से 3 दिन देर से आते हैं, तो यह नॉर्मल हो सकता है। पीरियड्स के दिनों में खान-पान में बदलाव से शरीर में कई बदलाव होते हैं। हार्मोनल बदलाव, मेंटल स्ट्रेस, ट्रैवल, खाने की आदतें और पूरी नींद न लेने से पीरियड्स बहुत देर से आ सकते हैं। इससे पीरियड्स साइकिल में रुकावट आ सकती है। अगर आपके पीरियड्स 7 से 10 दिन देर से आते हैं, तो घबराने की कोई बात नहीं है। लेकिन अगर पीरियड्स हर महीने देर से आते हैं, तो आपको डॉक्टर से सलाह लेकर इलाज करवाना चाहिए।

मासिक धर्म साइकिल में रुकावट के कारण:
शरीर में मेंटल स्ट्रेस बढ़ने से सेहत खराब होती है। स्ट्रेस बढ़ने से शरीर में 'कॉर्टिसोल' नाम के स्ट्रेस हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है। इससे ओव्यूलेशन प्रोसेस पर तुरंत असर पड़ता है। थायरॉइड या PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित महिलाओं को पीरियड्स जल्दी या देर से आ सकते हैं। इसके अलावा, कोई भी गोली लेने और गलत डाइट से पीरियड्स साइकिल में बदलाव आ सकते हैं।

पीरियड्स समय पर लाने के लिए ये टिप्स अपनाएं:
पीरियड्स समय पर लाने के लिए अपनी डाइट में आयरन, कैल्शियम, विटामिन B12 और फोलिक एसिड शामिल करें। इससे हॉर्मोन बैलेंस करने में मदद मिलती है। साथ ही, अपनी डेली डाइट में पपीता, अनानास, अदरक की चाय या हल्दी वाला दूध शामिल करें। हल्दी वाला दूध पीने से पेट की मसल्स को आराम मिलता है। अगर आपको पीरियड्स के दौरान बहुत दर्द होता है, तो हल्की एक्सरसाइज, वॉकिंग या योगा ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने में मदद करेगा। साथ ही, दिन में 3 से 4 लीटर पानी पिएं। खूब पानी पीने से शरीर से टॉक्सिन बाहर निकल जाते हैं। इसके अलावा, गुड़ और ऐसी चीजें खाएं जो पीरियड्स के दौरान शरीर को गर्म रखें।

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