बड़ी खबर! केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर 3.5 रुपये और डीजल पर 24 रुपये प्रति लीटर टैक्स लगाने का किया ऐलान, जानें डिटेल्स

फ्यूल को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। भारत सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स बढ़ा दिया है। यह बदलाव 3 अगस्त यानी आज से लागू हो गया है। अब पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स 2.50 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 3.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। जबकि डीज़ल के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स 15.50 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 24 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। यह फैसला इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों और एक्सपोर्ट से होने वाले मुनाफे और ग्लोबल मार्केट की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखकर लिया गया है। आइए इसके बारे में डिटेल में जानते हैं।
तेल कंपनियों के एक्सपोर्ट मुनाफे पर असर पड़ने की संभावना
केंद्र सरकार के टैक्स बढ़ाने का सीधा असर तेल कंपनियों के एक्सपोर्ट मुनाफे पर पड़ सकता है। हालांकि, घरेलू मार्केट में पेट्रोल और डीज़ल की रिटेल कीमतों पर इसका तुरंत सीधा असर पड़ने की संभावना नहीं है, क्योंकि भारत में फ्यूल की कीमतें कई फैक्टर्स के आधार पर तय होती हैं। आने वाले समय में मार्केट की नजर इंटरनेशनल कच्चे तेल की कीमतों और सरकार के आगे के रिव्यू पर रहेगी।
विंडफॉल टैक्स क्या है?
बहुत से लोगों ने सोचा होगा कि विंडफॉल टैक्स क्या है। जब ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की कीमतें तेज़ी से बढ़ती हैं, तो तेल बनाने वाली कंपनियों और रिफाइनिंग कंपनियों को एक्स्ट्रा प्रॉफिट होता है। सरकार इस एक्स्ट्रा प्रॉफिट पर एक खास टैक्स लगाती है, जिसे विंडफॉल टैक्स कहते हैं। इस टैक्स का मुख्य मकसद कंपनियों के प्रॉफिट का कुछ हिस्सा सरकार के रेवेन्यू में जमा करना है।
पहले भी हुए थे बदलाव
पहले, डीज़ल एक्सपोर्ट पर टैक्स 8.50 रुपये से बढ़ाकर 15.50 रुपये प्रति लीटर किया गया था। इसी तरह, ATF पर टैक्स 7.50 रुपये से बढ़ाकर 14.50 रुपये प्रति लीटर किया गया था। वहीं, पेट्रोल पर टैक्स घटाकर 2.50 रुपये प्रति लीटर किया गया था, जिसे अब फिर से बढ़ाकर 3.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
क्या इसका आम आदमी पर असर पड़ेगा?
अभी, यह टैक्स बदलाव सिर्फ एक्सपोर्ट किए जाने वाले पेट्रोल और डीज़ल पर लागू है। इसलिए, घरेलू मार्केट में पेट्रोल और डीज़ल की रिटेल कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, भविष्य में, दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सरकारी नीतियों का फ्यूल की कीमतों पर इनडायरेक्ट असर पड़ सकता है।
