Fatty Liver : शराब न पीने से लिवर को कैसे नुकसान होता है? सबसे बड़ी गलतियाँ क्या हैं?

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लिवर सिरोसिस, जिसे आम तौर पर शराब से जुड़ी बीमारी माना जाता था। लेकिन, अब यह गंभीर बीमारी उन लोगों को भी हो रही है जो शराब बिल्कुल नहीं पीते या बहुत कम पीते हैं। इसके मुख्य कारण रोज़ की आदतें, डाइट और वज़न बढ़ना, डायबिटीज़ और लंबे समय तक बैठे रहने वाले काम बताए जाते हैं।
साइलेंट किलर बीमारी
इस बीमारी को हमेशा से साइलेंट किलर कहा जाता रहा है। क्योंकि यह बीमारी बिना किसी बड़े लक्षण के धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती है। जब तक इसके लक्षण साफ़ होते हैं, तब तक लिवर काफी हद तक खराब हो चुका होता है। इस बारे में डॉ. वसीम ने कहा है कि सिरोसिस को पहले शराब से जोड़ा जाता था। लेकिन, अब यह बीमारी मोटापा, गलत डाइट, डायबिटीज़ और फैटी लिवर जैसी लाइफस्टाइल बीमारियों से जुड़ी है।
लिवर एक ज़रूरी अंग है और इसका काम खाना पचाना, टॉक्सिन को फ़िल्टर करना और बैलेंस्ड मेटाबॉलिज़्म बनाए रखने में मदद करना है। लेकिन, जब लिवर पर दबाव पड़ता है। चाहे वह फैट जमा होने, इंफेक्शन या किसी और वजह से हो, तो उसमें धीरे-धीरे स्कार टिशू बनने लगते हैं। इससे सिरोसिस होता है। शुरुआत में लक्षण हल्के होते हैं, इसलिए कोई ध्यान नहीं देता। लगातार थकान, भूख न लगना, पेट में हल्की तकलीफ, बिना किसी वजह के वज़न कम होना। बहुत से लोग इस पर ध्यान नहीं देते क्योंकि यह स्ट्रेस या नींद की कमी की वजह से होता है। हालांकि, लोगों को इस बीमारी का पता तब चलता है जब यह पेट में सूजन, स्किन या आंखों का पीला पड़ना, बार-बार इंफेक्शन और कमजोरी तक बढ़ जाती है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
लिवर सिरोसिस सिर्फ एक अंग की बीमारी नहीं है, यह पूरे शरीर पर असर डालती है। यह डाइजेशन, इम्यूनिटी और ब्लड सर्कुलेशन पर असर डालती है। अगर समय रहते इसकी पहचान हो जाए तो इस कंडीशन को मैनेज किया जा सकता है। इसके लिए लिवर फंक्शन टेस्ट, अल्ट्रासाउंड और फाइब्रोसिस टेस्ट के ज़रिए बीमारी का पता लगाया जाता है। डॉ. शंकर कुमार गुप्ता कहते हैं कि शुरुआती स्टेज में लाइफस्टाइल में बदलाव करके डैमेज्ड एरिया को बचाना या थोड़ा ठीक करना मुमकिन है।
भारत में बढ़ते मामले –
भारत में नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। शहरी इलाकों में हर तीन में से एक नागरिक इस प्रॉब्लम से जूझ रहा है। इसलिए इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। घर पर हेल्दी डाइट लेना, रोज़ एक्सरसाइज़ करना, वज़न और डायबिटीज़ को कंट्रोल में रखना, डॉक्टर की सलाह के बिना दवा न लेना और समय-समय पर चेकअप करवाना, ये सब बीमारी के शुरुआती स्टेज में होने पर उसे बचा सकते हैं। अगर बीमारी गंभीर हो जाए, तो इलाज मुश्किल और महंगा हो जाता है। कई मामलों में लिवर ट्रांसप्लांट आखिरी ऑप्शन होता है।
