8th Pay Commission: नए फॉर्मूले से बदलेगी कर्मचारियों की किस्मत ; सैलरी के साथ पेंशन और अलाउंस पर भी पड़ेगा बड़ा असर

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आठवें पे कमीशन के बनने से सरकारी कर्मचारियों की सैलरी बढ़ने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। कई कर्मचारियों को लगता है कि सैलरी सिर्फ़ डियरनेस अलाउंस (DA) या फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर करती है, लेकिन इसके पीछे एक बहुत ज़रूरी फैक्टर है जिसे 'फ़ैमिली यूनिट' कहते हैं।
कर्मचारी यूनियनों ने सरकार से इस फ़ॉर्मूले को बदलने की मांग की है। क्योंकि इसी से आपकी बेसिक सैलरी, अलाउंस और पेंशन तय होती है। आइए समझते हैं कि यह 'फ़ैमिली यूनिट' क्या है और यह आपकी जेब पर कैसे असर डालता है।
'फ़ैमिली यूनिट' फ़ॉर्मूला क्या है?
आइए इसे आसान शब्दों में समझते हैं। पे कमीशन सबसे पहले एक औसत सरकारी कर्मचारी के परिवार को इज्ज़तदार ज़िंदगी जीने के लिए ज़रूरी कम से कम रकम का अंदाज़ा लगाता है। इस प्रोसेस को 'फ़ैमिली यूनिट' कहते हैं।
बेसिस: यह सिस्टम 'एक्रॉयड फ़ॉर्मूला' पर आधारित है, जो खाना, कपड़ा और रहने की जगह जैसी बेसिक ज़रूरतों पर होने वाले खर्च का हिसाब लगाता है।
कम्पोज़िशन: पारंपरिक रूप से, इसमें कर्मचारी, पति, पत्नी और बच्चे शामिल होते हैं। उनके कुल खर्च के आधार पर मिनिमम बेसिक वेज तय किया जाता है।
परिवार का साइज़ सैलरी पर कैसे असर डालता है?
सैलरी बढ़ने के प्रोसेस में परिवार एक 'मल्टीप्लायर' का काम करता है।
मिनिमम (न्यूनतम) खर्च: अगर पे कमीशन यह मान ले कि परिवार को अब पहले से ज़्यादा खाने, पढ़ाई और हेल्थ पर खर्च करना होगा, तो 'मिनिमम खर्च' का अंदाज़ा बढ़ जाएगा।
सैलरी में बढ़ोतरी: बेसिक सैलरी में बढ़ोतरी से पूरा सैलरी स्ट्रक्चर बदल जाता है, यानी, परिवार के सदस्यों की संख्या या उनकी अंदाज़न ज़रूरतों के बढ़ने के साथ बेसिक सैलरी और फिटमेंट फैक्टर सीधे बढ़ जाता है।
पुराना फ़ॉर्मूला अब बेकार, ट्रेड यूनियनों की क्या मांगें हैं?
ट्रेड यूनियनों का कहना है कि मौजूदा फ़ॉर्मूला दशकों पुराना है और आज की असलियत से बहुत दूर है।
बदलता हुआ खर्च: खाना, कपड़ा और रहने की जगह कभी बेसिक ज़रूरतें थीं। आज, शहरों में रहने का खर्च, बच्चों के प्राइवेट स्कूल की फ़ीस, महंगे हॉस्पिटल और ट्रांसपोर्ट का खर्च बहुत ज़्यादा बढ़ गया है।
माता-पिता की ज़िम्मेदारी:
लेबर यूनियन चाहते हैं कि 'फ़ैमिली' के कॉन्सेप्ट में सिर्फ़ बच्चे ही नहीं, बल्कि बुज़ुर्ग माता-पिता भी शामिल हों, क्योंकि कर्मचारी भी उनका साथ देते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भारत अब एक डेवलपिंग से डेवलप्ड देश बन रहा है। इसलिए, सैलरी सिर्फ़ 'ज़िंदा रहने' के लिए नहीं, बल्कि बेहतर जीवन स्तर के लिए होनी चाहिए।
कर्मचारियों के लिए इसकी अहमियत
अगर आठवां पे कमीशन 'फ़ैमिली यूनिट' फ़ॉर्मूले में बदलाव करता है, तो इसका असर सिर्फ़ बेसिक सैलरी पर ही नहीं, बल्कि डियरनेस अलाउंस (DA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और पेंशन पर भी पड़ेगा। इससे फिटमेंट फ़ैक्टर में काफ़ी बढ़ोतरी हो सकती है। इससे सरकार पर फ़ाइनेंशियल बोझ बढ़ेगा। लेकिन लाखों कर्मचारियों के लिए, बढ़ती महंगाई और कॉस्ट ऑफ़ लिविंग के सामने यह एक बड़ी राहत होगी।
