8th Pay Commission : आठवें वेतन आयोग को लेकर ज़रूरी अपडेट, केंद्रीय कर्मचारियों की 5 बड़ी मांगें; जुलाई में होगा बड़ा फ़ैसला

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सरकारी कर्मचारियों के लिए यह बहुत ज़रूरी खबर है। इस समय आठवें पे कमीशन को लेकर कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच गरमागरम चर्चा चल रही है। सभी संगठनों की मांगें 15 जून तक जमा कर दी गई हैं, और अब कमीशन क्या फैसला लेगा? इस पर सबकी नज़र है। एक ज़रूरी अपडेट सामने आया है।

कर्मचारी संगठनों को रिप्रेजेंट करने वाली नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने इस बार सिर्फ़ सैलरी बढ़ाने की ही मांग नहीं की है। उसने सर्विस कंडीशंस में कई पेंडिंग मुद्दों को भी कमीशन के सामने उठाया है। चूंकि ये मांगें कैबिनेट सेक्रेटरी ने भी आगे बढ़ा दी हैं, इसलिए अगली मीटिंग्स में इस पर ज़रूरी चर्चा होने की संभावना है।

कर्मचारी संगठनों ने हर पांच साल में पेंशन का रिव्यू करने की मांग की है। उन्होंने यह भी मांग की है कि पेंशनर्स को मिलने वाला फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA) पेंशन बढ़ाकर कम न किया जाए, बल्कि उसे और फायदेमंद बनाया जाए।

उन्होंने यह भी उम्मीद जताई है कि पेंशनर्स को मिलने वाला FMA बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति महीना किया जाना चाहिए। इसके अलावा, कर्मचारी की मौत के बाद परिवार वालों को मिलने वाली फैमिली पेंशन को बिना कम किए ज़्यादा फायदेमंद बनाने की भी मांग है।

एक और अहम मांग यह है कि सेंट्रल डिपार्टमेंट में फायरफाइटर कर्मचारियों की सैलरी दिल्ली फायर सर्विस के कर्मचारियों के बराबर की जाए। साथ ही, नियमों में बदलाव करने की भी मांग है ताकि MACP स्कीम का फायदा उठाकर प्रमोशन पाने वाले कर्मचारियों को सैलरी फिक्सेशन का पूरा फायदा मिल सके। संगठनों ने महिला कर्मचारियों के लिए मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट के सभी नियमों को बड़े पैमाने पर लागू करने पर भी जोर दिया है। इसमें पुरानी पेंशन स्कीम को फिर से लागू करने का मुद्दा उठाया गया है। आयोग 6-7 जुलाई को भुवनेश्वर में और 9-10 जुलाई को कोलकाता में अलग-अलग कर्मचारी संगठनों के साथ मीटिंग करेगा।

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