8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर! 8वें वेतन आयोग के नए फॉर्मूले से सैलरी में हो सकती है भारी बढ़ोतरी

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8th Pay Commission पर इस समय सेंट्रल गवर्नमेंट के कर्मचारियों के बीच ज़ोरों से चर्चा हो रही है। सैलरी कितनी बढ़ेगी, फिटमेंट फैक्टर क्या होगा और मिनिमम वेज कितना होगा, इसे लेकर कई अंदाज़े लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इस बार चर्चा का फोकस सिर्फ़ महंगाई भत्ता या सैलरी में बढ़ोतरी नहीं है, बल्कि सैलरी तय करने के तरीके में बदलाव का प्रस्ताव है। अभी तक सरकारी कर्मचारियों की मिनिमम वेज तय करते समय एक खास परिवार को ध्यान में रखा जाता था। लेकिन अब इस तरीके को बदलने की मांग सामने आई है। नए प्रस्ताव के मुताबिक, कर्मचारी संगठनों ने यह बात रखी थी कि कर्मचारी के परिवार में सिर्फ़ पति-पत्नी और बच्चे ही नहीं, बल्कि उन पर निर्भर माता-पिता को भी शामिल किया जाना चाहिए।

कैलकुलेशन के आधार पर मिनिमम वेज कितना होना चाहिए?

मौजूदा सिस्टम में सैलरी तय करते समय तीन सदस्यों वाले परिवार को आधार माना जाता है। इसी कैलकुलेशन के आधार पर मिनिमम वेज और फिटमेंट फैक्टर तय किए जाते हैं। लेकिन आज के बदले हुए सोशल हालात में, कई कर्मचारी अपने बुज़ुर्ग माता-पिता की भी देखभाल कर रहे हैं। इसलिए, परिवार की परिभाषा को बढ़ाने की मांग बढ़ रही है ताकि सैलरी कैलकुलेशन असलियत से मेल खाए। इस प्रस्ताव के मुताबिक, परिवार के सदस्यों की संख्या पांच मानी जा सकती है। इसमें कर्मचारी, उसकी पत्नी या पति, बच्चे और माता-पिता शामिल होंगे। अगर यह प्रस्ताव मान लिया जाता है, तो मिनिमम वेज तय करते समय ज़रूरी खर्चों का कैलकुलेशन भी बदल जाएगा। खाना, रहना, पढ़ाई, हेल्थ, कपड़े और दूसरी रोज़मर्रा की ज़रूरतों का खर्च ज़्यादा बड़े पैमाने पर कैलकुलेट किया जाएगा।

कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में कितना होना चाहिए?

इसी बदलाव का असर फिटमेंट फैक्टर पर भी पड़ सकता है। अगर अब तक इस्तेमाल हो रहे रेश्यो से ज़्यादा फैक्टर लगाया जाता है, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में काफ़ी बढ़ोतरी होने की संभावना है। कुछ अनुमानों के मुताबिक, यह आंकड़ा 3.83 तक जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो मौजूदा मिनिमम बेसिक सैलरी में काफ़ी बढ़ोतरी होने की संभावना है। उसके बाद महंगाई भत्ता, हाउस रेंट अलाउंस और दूसरी सुविधाएं अलग से दी जाएंगी।

कोई ऑफिशियल घोषणा नहीं
हालांकि, यह सब अभी प्रस्ताव के स्टेज पर है। इस बारे में सरकार की तरफ से कोई ऑफिशियल घोषणा नहीं की गई है। इसलिए, अभी जिन आंकड़ों पर बात हो रही है, उन्हें पक्का नहीं माना जा सकता। आखिरी फैसला पे कमीशन की सिफारिशों और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही साफ होगा।

कर्मचारी यूनियन ने क्या कहा?
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि आजकल कई सरकारी कर्मचारियों पर अपने बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी है। इसलिए सैलरी तय करते समय उनके खर्चों पर भी ध्यान देना होगा। कुछ कानूनों में भी माता-पिता की देखभाल की जिम्मेदारी को साफ किया गया है। इसलिए संगठनों की राय है कि इस मांग का कानूनी और सामाजिक आधार है।

दूसरी ओर, आर्थिक जानकारों की राय थोड़ी सतर्क है। उनके मुताबिक, सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी से सरकार पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। इसलिए कर्मचारियों की उम्मीदों और सरकारी खजाने के बीच बैलेंस बनाकर फैसला लिया जा सकता है।

कुल मिलाकर, इस बार 8वें पे कमीशन में सिर्फ सैलरी बढ़ोतरी की चर्चा नहीं है, बल्कि परिवार के बदलते स्वरूप को देखते हुए सैलरी तय करने में एक नई दिशा सामने आ रही है। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की इनकम में बड़ा बदलाव आ सकता है। इसलिए अब सबका ध्यान पे कमीशन की आखिरी सिफारिशों और केंद्र सरकार के फैसले पर है।

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