टीकाकरण स्वैच्छिक होने के बावजूद लोगों पर टीकाकरण का दबाव, जानिए क्या कहते हैं सरकार के नियम

कोरोना टीकाकरण
दुनिया भर में एक बार फिर कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा है, कई देशों ने फिर से जरूरी प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार गंभीर कोरोना संक्रमण और मौत के जोखिम से बचने के लिए सभी को टीका लगवाना चाहिए। टीकाकरण अभियान के समुदाय आधारित डिजिटल सर्वेक्षण में बहुत चौंकाने वाली बात सामने आई है। सर्वेक्षण के अनुसार, 4 में से 1 नागरिक का कहना है कि स्थानीय प्रशासन और कंपनियों ने कोविड टीकाकरण अनिवार्य कर दिया है। कई कार्यालय ऐसे लोगों को प्रवेश नहीं देते हैं जिनका टीकाकरण नहीं हुआ है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि देश में कोविड-19 का टीकाकरण पूरी तरह से स्वैच्छिक है।

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 देश के 328 जिलों में 36,000 लोगों के एक सर्वेक्षण से टीकाकरण की अनिवार्यता का पता चला है। सर्वे में शामिल 26 फीसदी लोगों के मुताबिक उनके जिले में स्थानीय प्रशासन द्वारा टीकाकरण अनिवार्य कर दिया गया है। कई कार्यालयों में, कर्मचारियों को वैक्सीन की दूसरी खुराक प्रमाणित होने के बाद ही प्रवेश की अनुमति दी जाती है। इतना ही नहीं राशन व अन्य सरकारी सुविधाओं के लिए टीकाकरण प्रमाण पत्र की भी मांग की जा रही है। इसके अलावा गैस एजेंसियों, पेट्रोल पंपों जैसी कई जगहों पर सिर्फ वैक्सीन की कम से कम एक खुराक लेने वालों को ही सुविधा देने का नियम बनाया गया है।

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